ਬੱਚਿਆ ਨੂੰ ਪਾਰਕ ਲਿਜਾਂਦੇ ਸਮੇਂ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣ ਵਾਲਿਆ ਗੱਲਾਂ

 ਸੱਤ ਸ਼੍ਰੀ ਆਕਾਲ ਜੀ,

                       ਪਾਰਕ ਲਿਜਾਂਦੇ ਸਮੇ ਬੱਚਿਆ ਨੂੰ ਮੌਸਮ ਦੇ ਅਨੁਕੂਲ ਕੱਪੜੇ ਪਹਿਨਾ ਕੇ ਲਿਜਾਓ ਕੱਪੜੇ ਬਹੁਤ ਜਿਆਦਾ ਮਹਿੰਗੇ ਨਾ ਪਹਨਾਓ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਧੂੜ ਮਿੱਟੀ ਨਾਲ ਖਰਾਬ ਹੋਣ ਦਾ ਡਰ ਬਣਿਆ ਰਹੇਗਾ ਅਤੇ ਬੱਚਾ ਖੁੱਲ ਕੇ ਨਹੀਂ ਖੇਡ ਸਕੇਗਾ।

                    ਜਦੋਂ ਵੀ ਪਾਰਕ ਵਿੱਚ ਜਾਓ ਆਪਣੇ ਨਾਲ ਕੁੱਝ ਖੇਡਣ ਵਾਲਾ ਸਾਮਾਨ ਜਰੂਰ ਕੇ ਕੇ ਜਾਓ ਜਿਵੇਂ ਬੈਟ ਬਾਲ, ਲੁੱਡੋ, ਬੈਡਮਿੰਟਨ, ਫੁੱਟਬਾਲ ਆਦਿ। ਬੱਚੇ ਬੋਰ ਨਾਂ ਹੋਣ, ਇਸ ਲਈ ਆਪਣੇ ਬੱਚਿਆ ਨਾਲ ਗੁਆਂਢੀ ਦੇ ਬੱਚਿਆ ਨੂੰ ਵੀ ਲਿਜਾਓ।

                    ਪਾਰਕ ਵਿੱਚ ਲਿਜਾਂਦੇ ਸਮੇ ਬੱਚੇ ਦੀ ਜੇਬ ਵਿੱਚ ਇਕ ਕਾਰਡ ਪਾਂ ਦਿਓ ਜਿਸ ਵਿਚ ਉਸ ਦਾ ਨਾਂਅ, ਘਰ ਦਾ ਪਤਾ ਅਤੇ ਫੋਨ ਨੰਬਰ ਲਿਖਿਆ ਹੋਵੇ। ਬੱਚੇ ਦੇ ਕਹਿਣ ਤੇ ਖੁਦ ਵੀ ਬੱਚੇ ਦੇ ਨਾਲ ਖੇਡੋ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਓਹ ਬੋਰ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ।

                   ਪਾਰਕ ਜਾਂਦੇ ਸਮੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਬੋਤਲ ਅਤੇ ਕੁੱਝ ਖਾਣ ਦਾ ਸਾਮਾਨ ਆਪਣੇ ਨਾਲ ਜਰੂਰ ਲੈਕੇ ਜਾਓ ਇਸ ਨਾਲ ਬੱਚਾ ਬਾਹਰ ਦੀਆਂ ਗੰਦੀਆ ਚੀਜ਼ਾ ਖਾਣ ਦੀ ਜਿੱਦ ਨਹੀਂ ਕਰੇਗਾ। ਝੁਲਾ ਝੂਲਦੇ ਸਮੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਕੋਲ ਖੜ੍ਹੇ ਰਹੋ ਜਾਂ ਦੂਰੋ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਕਿਤੇ ਕੋਈ ਦੁਰਘਟਨਾ ਨਾ ਵਾਪਰ ਜਾਵੇ।

                     ਪਤੀ ਦੀ ਛੁੱਟੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਸਨੂੰ ਵੀ ਪਾਰਕ ਵਿਚ ਜਾਣ ਲਈ ਕਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਬੱਚਿਆ ਨੂੰ ਪਿਤਾ ਦੇ ਨਾਲ ਸਮਾਂ ਬਿਤਾਉਣ ਵਿਚ ਮਜ਼ਾ ਆਵੇਗਾ ਅਤੇ ਥੋਡੇ ਪਤੀ ਨੂੰ ਵੀ ਕੁੱਝ ਬਦਲਾਅ ਮਹਿਸੂਸ ਹੋਵੇਗਾ।

                    ਪਾਰਕ ਦੇ ਕਰਮਚਾਰੀਆਂ ਨਾਲ ਬੱਚਿਆ ਦੀ ਜਾਣ ਪਛਾਣ ਜਰੂਰ ਕਰਵਾਓ ਤਾਕਿ ਲੋੜ ਪੈਣ ਤੇ ਓਹ ਥੋਡੀ ਕੁੱਝ ਮਦਦ ਕਰ ਸਕਣ। ਬੱਚਿਆ ਨੂੰ ਘਰ ਤੋ ਹੀ ਸਮਝਾ ਕੇ ਲਿਜਾਓ ਕਿ ਪਾਰਕ ਵਿਚ ਜਾ ਕੇ ਫੁੱਲ ਨਾ ਤੋੜਨ ਅਤੇ ਨਾ ਹੀ ਖਾਣ ਪੀਣ ਦੀਆ ਚੀਜਾਂ ਇਧਰ ਉਧਰ ਸੁੱਟਣ। ਇਸ ਨਾਲ ਪਾਰਕ ਗੰਦਾ ਅਤੇ ਵਾਤਾਵਰਨ ਦੂਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।

                                ਧੰਨਵਾਦ ਸਹਿਤ।

                   

समय का महत्व (Importance of time)

सत श्री अकाल जी/नमस्ते जी,

                             दोस्तो आज बात करते है हम समय की, समय के महत्व की आज के समय में किसे के पास किसी के लिए समय ही नहीं है। रिश्तेदारों में रिश्ते कम हो रहे दोस्तो की दोस्ती खतम हो रही थी है समय समय के साथ सब में दरारे आ रही है और कोई किसे के लिए मौका पर काम नहीं आता पैसा सब के लिए भगवान बन चुका है। आओ समय के कुछ पहलू पर बात करते है।

                            समय के साथ रिश्ते बहुत कमजोर होते जा रहे है पहले के समय रिश्ते इतने मजबूत होते थे कि एक दूसरे बिना जी नहीं पाते थे पहले के समय घर एक होता था सभी एक ही छत के नीचे रहते थे और एक ही चुल्हा होता था सभी एक ही चुल्हे के सामने बैठ कर खाना खाते थे और सभी में प्यार होता था चाहे लोग अनपढ़ थे पर पहले के समय में रिश्ते मजबूत होते थे पर आज के समय में जितने लोग पढ़े लिखे है उतने ही लोगो में रिश्ते निभाने की काबिलियत कम होती जा रही है।

                           समय के साथ दोस्तो का प्यार भी कम होता जा रहा है पहले के समय दोस्तो की दोस्ती की कस्मे खाई जाती थी लेकिन अब दोस्त चाहे जितना मर्जी दोस्ती निभा रहा है पर जब दोस्त पर मुश्किल समय है तब दोस्त दोस्त के काम नहीं आता और तो और तब उससे बात तक नहीं करता समय पर काम ना आना कैसी दोस्ती आज के समय दोस्ती और रिश्तेदारी सभी पैसे के लिए है अगर आपकी जेब में पैसे है तो रिश्तेदार आपके दोस्त भी आपके जब खाली जेब है तो दोनों में से कुछ नहीं सब समय की बात है।

                         आज मोबाइल फोन भी समय का सबसे बड़ा दुश्मन है आज के समय में हर लोगो के पास मोबाइल है सब मोबाइल में व्यस्त है घर में जितने सदस्य है सब के पास मोबाइल है और आज के बच्चे भी मोबाइल के बिना बात तक नहीं करते है पहले के समय में मोबाइल नहीं थे तो रिश्ते बहुत मजबूत थे सब को एक दूसरे की परवाह होती थी पर आज कल सभी के हाथ में मोबाइल रिश्ते कमजोर होते जा रहे है आज समय बिल्कुल बदल गया है किसे के पास बात करने तक का वक़्त नहीं है घर में बैठे सब है पर हाथ में मोबाइल लेकर कोई एक दूसरे से बात नहीं करता।

                       आज के समय में नौजवान पीढ़ी अपने आप को ज्यादा समझदार समझती है वो सोचते है के माता पिता को कुछ नहीं पता तो उनको एहसास तब होता है जब उनके बच्चे बोलते है के पापा आपको कुछ नहीं पता आज के समय में बच्चे बहुत आगे निकल चुके है समय से पहले की बात करते है।

                       नौजवान पीढ़ी से बिनती है के समय अभी निकला नहीं है अपनी आज के समय में जो भी गलतियां है उनको सुधार ले ताकि आने वाले समय में पछताना ना पड़े समय बहुत बलवान है आज के समय की गई किसी की मदद आपको आने वाले समय में फल मिलेगा। आज आप हर किसी की मदद करने के लिए तैयार रहे और अपना समय व्यर्थ मत गवाए। समय की महत्व को समझें।

                      धन्यवाद सहित।

                     
                          

सुबह दौड़ने के शरीर पर प्रभाव (Morning Walk)

सत श्री अकाल जी/ नमस्ते जी,

                                         दौड़ना कसरत के सब से आसान रूप में से एक है, क्योंकि यह ना सिर्फ हमारे भार को कम करता है, बल्कि सेहतमंद भी बनाता है। फिर हम जानते है रोजाना दौड़ने के साथ शरीर को होने वाले निम्नलिखित फ्यादे के बारे-

                        तनावमुक्त करता है- रोज की दौड़ पूरे शरीर के लिए टानिक की तरह होता है क्योंकि दौड़ने के साथ शरीर में इंदाफ्रिन नामक रसायन भाव फीलगुड रसायन का रस होता है और हम तनावमुक्त रहते है।

                         दिल तंदरुस्त रहता है- सभी डॉक्टर का कहना है कि रोजाना दौड़न के साथ दिल तंदरुस्त रहता है और दिल का दौर और उच्च खून दबाव जैसी बीमारियों को नजदीक नहीं आने देता।

                      हड्डियों को मजबूत बनाता है- आयुर्वेद की माने तो दौड़ने के साथ पैरों की हड्डियां में मजबूती आती है। पैरों की हड्डियों में ही शरीर के लिए सब से ज्यादा मात्रा में खून का निर्माण होता है नतीजे से पैरों और जांघों की हड्डियां मजबूत होती है।

                   फेफड़े तंदरुस्त रहते है- डॉक्टरों के अनुसार दौड़ने से दिल की यमनिया बढ़ती है जिस के साथ फेफड़े मजबूत होते है यही नहीं इस के साथ सांस की प्रक्रिया में भी सुधार आता है।

                     शुगर का नाश करता है-  अगर आप अपने शरीर में से शुगर जैसे रोगों का नाश करना चाहते हो तो हर रोज 5 मिनट दौड़े, क्योंंकि इस के साथ इंसुलिन बनन की प्रक्रिया में सुधार होता है और शरीर में खून शुगर की मात्रा कंट्रोल में रहता है।

                    रोगों के साथ लड़ने के की शक्ति बढ़ती है- दौड़ने के साथ रोगों के साथ लड़ने की समर्था मजबूत होती है और हम छोटे मोटे रोगों की गिरफ्त में नहीं आते।

                      दौड़ने के साथ हमें व्यायाम भी करते रहने चाहिए क्योंकि आज की व्यस्त जिंदगी में हम शरीर को कष्ट देने भूल गए है सारा दिन बैठे बैठे कम करने की आदत ने हमारे शरीर में सुस्ती डाल दी है जिस कारण हमें बहुत सी बीमारियों ने घेर रखा है और हम लोग अपने शरीर को बीमारियां का शिकार बना लेते है और फिर डॉक्टरों की सलाह लेते है।
                     अगर हम पहले ही डॉक्टरों की जगह किसी खुले आसमान में घर से निकलकर व्यायाम करें जिस से हमारे शरीर में फुर्ती आये और सुस्ती ना आए इस लिए हमें सब को रोज सुबह सुबह दौड़ना चाहिए और व्यायाम भी करना चाहिए ताकि शरीर रोगों से मुक्त रहे। नौजवान पीढ़ी से निवेदन है के आप भी शरीर व्यायाम करे आगे अपने बच्चो को भी प्रेरित करें।

                    धन्यवाद सहित।
                

जरूरतमंदो की मदद (Being Humanity)

सत श्री अकाल जी/नमस्ते जी,

                                 दोस्तो अगर छिपकली ऐसा कर सकती है तो हम क्यों नहीं। यह जापान की एक सच्ची घटना है।

                                  एक आदमी अपने पुराने घर को नया बनाने के लिए अपने घर की दीवार जो कि लकड़ी की बनी हथी काट कर गिरा रहा था तो उस वक़्त उसकी नजर एक छिपकली पर पड़ी जो लकड़ी के साथ चिपकी हुई थी तो आदमी ने गौर से देखा कि छिपकली के के एक पैर पर कील लगी हुई थी जो पांच साल पहले मकान बनाते समय लगाई गई थी और छिपकली हिल जुल भी नहीं सकती थी लेकिन छिपकली फिर भी जीवत थी।

                                छिपकली को देख कर अब आदमी यही सोच रहा था कि छिपकली इतने सालो से जीवित कैसे थी इतने सालो में छिपकली ने अपने खाने का प्रबंध कैसे किया होगा इतने अंधेरे में रहकर भी छिपकली ने कैसे खाना खाया होगा। आदमी इतना सोचते सोचते आपना काम छोड़ कर एक जगह पर बैठ गया।

                                 आदमी सोच ही रहा था कि आदमी ने देखा कि एक ओर छिपकली अपने मुंह में खाना लेकर अाई और दूसरी छिपकली के मुंह में खाना डाल कर चली गई आदमी टकटकी लगाकर देखता ही रह गया और हैरान रह गया कि एक छिपकली अपनी साथी छिपकली को पिछले पांच सालों से लगातार खाना खिला रही है। अपनी साथी छिपकली की जान बचाने के लिए अपनी आस नहीं छोड़ी और लगातार पिछले पांच सालो से खाना खिला रही है।

                                अजीब है एक छोटा सा जीव ऐसा कर सकता है पर परमात्मा ने मनुष्य को इतना सुंदर जीव बनाइए है तो मनुष्य ऐसा क्यों नहीं कर सकता।
                                कृपया करके अपने प्रिय लोगो को ना छोड़ो बुरे वक़्त मैं कभी भी पीठ मत दिखाओ। अच्छे बुरे दिन किसे पर भी आ सकते है बंदे के हालात कभी भी बदल सकते है। कुदरत ने हमारी उंगलियों और अंगूठे के बीच इस लिए जगह दी है ताकि किसी जरूरतमंद की बाजू पकड़ सके। आज साथ दो कल आपका साथ देने के लिए आगे आयेगा।

                              आज पंजाब में बाढ जैसे हालात है लोगो के घर तबाह हो चुके है लोगो के दूध देने वाले जानवर मर गए है पकी पकाई फसल तबाह हो गई है घरों में पानी आने के कारण लोगो के रोजमर्रा का सामान बर्बाद हो चुका है सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए। फौज के जवान एनडीआरएफ के जवान दिन रात लगे हुऐ है लोगो की मदद के लिए। कुछ समाज सेवी संस्थाएं मदद के लिए लगी हुई है। हमारे गांव की भी पंचायत बा नौजवान क्लब भी मदद में लगी हुई है। अब सरकार को चाहिए के लोगो को उनके घर, फसल, और दूध देने वाले पशु जो मरे है उनका मुआवजा देना चाहिए ताकि लोगो की जिंदगी फिर सही चल सके।

                             मैं उन सभी का दिल से धन्यवाद करता हूं जो इस समय लोगो की मदद कर रहे है। और नौजवान पीढ़ी को भी बिनती है के ज्यादा से ज्यादा मदद करे चाहे कहीं भी मौका मिले मदद के लिए आगे आए।

                               धन्यवाद सहित।
   
                       

ਖਾਣ ਪੀਣ ਦੇ ਬਦਲਾਅ ( change in food today)

ਸੱਤ ਸ਼੍ਰੀ ਆਕਾਲ ਜੀ,

                        ਦੋਸਤੋ ਅੱਜ ਗੱਲ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ਆਪਾ ਖਾਣ ਪੀਣ ਦੇ ਬਦਲਾਅ ਬਾਰੇ ਅੱਜ ਦੇ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਦੇ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਖਾਣ ਵਾਲਿਆ ਚੀਜਾ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਫਰਕ ਪੈ ਗਿਆ ਹੈ ਪਹਿਲਾ ਦੇ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਹਰ ਚੀਜ ਖਾਣ ਵਾਲੀ ਵਿੱਚ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕੁਦਰਤੀ ਤੇ ਤਾਕਤ ਭਰਪੂਰ ਹੁੰਦੀ ਸੀ ਪਰ ਅੱਜ ਦੇ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਸਾਰਿਆ ਚੀਜਾ ਹੀ ਖਾਣ ਵਾਲਿਆ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਦਵਾਈ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਹੋਈਆਂ ਹੁੰਦੀਆ ਹਨ।

                         ਪੁਰਾਤਨ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਚੁੱਲ੍ਹੇ ਵਰਤੋਂ ਵਿੱਚ ਲੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਸਨ ਅਤੇ ਸਰਬ ਲੋਹੇ ਦੇ ਭਾਂਡੇ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਸਨ ਜਿਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਮਾਂ ਦੇ ਹੱਥਾਂ ਦੀਆ ਬਣਾਈ ਹੋਈ ਹਰ ਇੱਕ ਚੀਜ ਖਾਣ ਵਿੱਚ ਸੁਆਦ ਹੁੰਦੀ ਸੀ ਪਰ ਅੱਜ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਸੱਭ ਕੁੱਝ ਬੰਦ ਪੈਕਟਾਂ ਦਾ ਖਾਣਾ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਜੋਹ ਸਾਡੀ ਸਿਹਤ ਨਾਲ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਖਿਲਵਾੜ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜਿਆਦਾ ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਵਿੱਚ ਲਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ।

                         ਪਹਿਲਾ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਚੁੱਲ੍ਹੇ ਤੇ ਬਣੇ ਹੋਏ ਹਰ ਉਸ ਚੀਜਾ ਵਿੱਚ ਜਾਨ ਹੁੰਦੀ ਸੀ ਤੇ ਬੰਦਾ ਬੀਮਾਰ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸੀ ਹੁੰਦਾ ਪਰ ਅੱਜ ਕੱਲ੍ਹ ਬਾਹਰ ਦੀਆ ਚੀਜਾਂ ਖਾ ਕੇ ਬੰਦਾ ਸਿੱਧਾ ਹਸਪਤਾਲ ਵਿੱਚ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਪਹਿਲਾ ਦੁੱਧ ਨੂੰ ਵੀ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਭਾਂਡੇ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਗਰਮ ਕਰਕੇ ਜਦ ਤੱਕ ਲਾਲ ਨਾ ਹੋ ਜਾਵੇ ਪੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਸੀ ਪਰ ਅੱਜ ਕੱਲ੍ਹ ਤਾਂ ਦੁੱਧ ਵੀ ਬਣਾਵਟੀ ਆਉਣ ਲੱਗ ਪਿਆ ਸਿਹਤ ਸੁਆਹ ਬਣਨੀ।

                         ਪਹਿਲਾ ਦੇ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਰੋਟੀ ਖਾਣ ਲੱਗਿਆ ਨਾਲ ਪਾਣੀ ਪੀਣ ਲਈ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਸੀ ਸਗੋ ਲੱਸੀ ਜਾਂ ਕੱਚੀ ਲੱਸੀ ਪੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਸੀ ਨਾਲ ਮੱਖਣ, ਦਹੀਂ, ਆਦਿ ਸੱਭ ਵਰਤੋਂ ਵਿੱਚ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਸੀ ਪਰ ਅੱਜ ਦੇ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਕੱਚੀ ਲੱਸੀ ਕੋਈ ਨਹੀਂ ਪੀਂਦਾ ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਅੱਜ ਦੇ ਬੱਚੇ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਚੀਜਾ ਨੂੰ ਮੂੰਹ ਵੱਟ ਦੇ ਹਨ। 

                         ਪਹਿਲਾਂ ਦੇ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਖੁਰਾਕਾਂ ਖੁੱਲਿਆ ਹੁੰਦੀਆ ਸਨ ਤੇ ਮੁੰਡੇ ਵੀ ਜਵਾਨ ਤਕੜੇ ਹੁੰਦੇ ਸਨ ਅੱਜ ਦੇ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਓਹ ਖੁਰਾਕਾਂ ਹੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ਪਹਿਲਾਂ ਸਰੋ ਦੇ ਸਾਗ ਵਿੱਚ ਮੱਖਣ ਜਾਂ ਦੇਸੀ ਘਿਉ ਦੀ ਅੱਧੀ ਕੌਲੀ ਪਾਂ ਕੇ ਖਾਧਾ ਜਾਂਦਾ ਸੀ ਨਾਲ ਲੱਸੀ ਹੋਣੀ ਨਾਲ ਮੂਲੀ ਤੇ ਆਚਾਰ ਹੋਣਾ ਪਰ ਅੱਜ ਦੇ ਸਮੇ ਦੀਆ ਕੁੜੀਆਂ ਨੂੰ ਸਾਗ ਤੱਕ ਬਣਾਉਣਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦਾ ਬਾਕੀ ਚੀਜਾਂ ਕਿੱਥੋਂ ਆਉਣੀਆ।

                            ਪਹਿਲਾ ਦੇ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਹਰ ਇੱਕ ਓਹ ਚੀਜਾਂ ਵਿੱਚ ਜਾਨ ਹੁੰਦੀ ਸੀ ਕਿਉਂਕਿ ਸੱਭ ਚੀਜਾਂ ਘਰ ਵਿੱਚ ਹੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੀਆ ਸਨ ਜਿਵੇਂ ਘਰ ਦੀ ਖੇਤੀ ਵਿੱਚ ਹੀ ਸਾਰਿਆ ਲੋੜੀਂਦਾ ਚੀਜਾਂ ਬੀਜਿਆ ਜਾਂਦੀਆ ਸਨ ਪਰ ਅੱਜ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਸੱਭ ਚੀਜ਼ਾ ਮੁੱਲ ਲੈਣੀਆਂ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ ਚਾਹੇ ਓਹ ਵਧੀਆ ਹੋਵੇ ਚਾਹੇ ਵਧੀਆ ਨਾ ਹੋਵੇ। 

                             ਪਿੰਡਾ ਵਿੱਚ ਤਾਂ ਹਜੇ ਵੀ ਫਿਰ ਵੀ ਕੁਦਰਤੀ ਚੀਜਾਂ ਖਾਣ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋਂ ਲਈ ਜਾਂਦੀਆ ਹਨ ਪਰ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ ਤਾਂ ਸਾਰਿਆ ਚੀਜਾਂ ਹੀ ਮੁੱਲ ਲੈਕੇ ਖਾਣੀ ਪੈਂਦੀ ਆ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਕਣਕ, ਚੋਲ, ਦੁੱਧ, ਦਾਲਾ, ਇਥੋਂ ਤੱਕ ਕੇ ਪਾਣੀ ਵੀ ਜੌ ਸਾਨੂੰ ਮੁੱਲ ਹੀ ਲੈਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ। ਪਿੰਡਾ ਵਿੱਚ ਤਾਂ ਚੁੱਲ੍ਹੇ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਵਾਸਤੇ ਪਾਥੀਆਂ, ਲਕੜਾ ਬਾਲਿਆ ਜਾਂਦੀਆ ਸਨ ਪਰ ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ ਗੈਸ ਚੁੱਲ੍ਹੇ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਜੋਂ ਸਾਡੀ ਸਿਹਤ ਤੇ ਸਾਡੇ ਜੀਵਨ ਵਾਸਤੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਖਤਰਨਾਕ ਹੈ।

                              ਅੱਜਕਲ੍ਹ ਦੀ ਨੌਜਵਾਨ ਪੀੜ੍ਹੀ ਤੇ ਬੱਚੇ ਫਾਸਟ ਫੂਡ ਜਿਵੇਂ ਬਰਗਰ, ਨੂਡੇਲ, ਸਪਰਿੰਗ ਰੋਲ ਟਿੱਕੀ, ਸਮੋਸੇ ਆਦਿ ਹੋਰ ਕਈ ਚੀਜ਼ਾ ਖਾਂਦੀਆ ਹਨ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਾਡੇ ਨੌਜਵਾਨ ਪੀੜ੍ਹੀ ਦੇ ਸਹਿਤ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਫਰਕ ਪੈਂਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਸਰੀਰ ਪਤਲਾ ਤੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋਈ ਜਾਣਾ। ਨੌਜਵਾਨ ਪੀੜ੍ਹੀ ਨੂੰ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਕੇ ਆਪ ਕੁਦਰਤੀ ਚੀਜ਼ਾ ਖਾਣ ਤੇ ਸਰੀਰ ਨਰੋਏ ਰੱਖਣ ਅਤੇ ਆਪਣੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਵੀ ਘਰ ਦੀਆ ਬਣੀ ਚੀਜਾਂ ਹੀ ਖਵਾਨ ਤਾਕਿ ਬੱਚਿਆ ਦਾ ਦਿਮਾਗ ਤੇ ਸਿਹਤ ਦੋਨੋ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਹੋਵੇ।

                                ਧੰਨਵਾਦ ਸਹਿਤ।

ਬੱਚਿਆ ਦੀ ਦੇਖ ਭਾਲ (care of children)

ਸੱਤ ਸ਼੍ਰੀ ਆਕਾਲ ਜੀ,

                           ਦੋਸਤੋ ਗੱਲ ਕਰਦੇ ਅੱਜ ਆਪਾ ਬੱਚਿਆ ਦੇ ਦੇਖ ਭਾਲ ਦੀ। ਬੱਚੇ ਰੱਬ ਦੇ ਦਿੱਤੇ ਹੋਏ ਓਹ ਅਨਮੋਲ ਖਜਾਨੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਕਰਕੇ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਰੌਣਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਮਾਪਿਆਂ ਦੇ ਅੱਖਾ ਦਾ ਨੂਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਬੱਚਿਆ ਦੀ ਕੀਮਤ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਪੁੱਛ ਕੇ ਦੇਖੋ ਜਿਹਨਾਂ ਦੇ ਘਰ ਕੋਈ ਔਲਾਦ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਰੱਬ ਏਦਾ ਦਾ ਕੋਈ ਵੀ ਘਰ ਨਾ ਰੱਖੇ ਜਿਹਨਾਂ ਘਰ ਬੱਚੇ ਨਾ ਹੋਣ।

                          ਹੁਣ ਆਪਾ ਗੱਲ ਕਰਦੇ ਆ ਬੱਚਿਆ ਦੀ ਦੇਖ ਭਾਲ ਦੀ ਬੱਚਿਆ ਦਾ ਜਨਮ ਜਦੋਂ ਹੁੰਦਾ ਸਾਨੂੰ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਦੇਖ ਭਾਲ ਓਦੋਂ ਤੋਂ ਹੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਜਿਵੇਂ ਮੌਸਮਾਂ ਅਨੁਸਾਰ ਬਚਾ ਕੇ ਰੱਖਣਾ, ਬੁਰੀਆ ਨਜਰਾਂ ਤੋਂ, ਉਪਰੇ ਲੋਕਾਂ ਤੋਂ, ਬੱਚਿਆ ਦੇ ਖਾਣ ਪੀਣ ਬਾਰੇ, ਕੱਪੜੇ ਪਾਉਣ ਬਾਰੇ ਆਦਿ ਸੱਭ ਦੇਖ ਭਾਲ ਵਿੱਚ ਹੀ ਆਉਂਦੇ ਹਨ।

                          ਬੱਚਿਆ ਦੀ 5 ਸਾਲ ਤੱਕ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਪਿਆਰ ਤੇ ਲਾਡਾ ਨਾਲ ਪਾਲਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਇਸ ਉਮਰ ਤੱਕ ਤਾਂ ਬੱਚਿਆ ਨੂੰ ਕਦੇ ਵੀ ਸਖਤੀ ਨਾਲ ਪੇਸ਼ ਆਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਉਮਰ ਤੱਕ ਦੇ ਬੱਚਿਆਂ ਚ ਬਚਪਨਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਉਮਰ ਤੱਕ ਬੱਚਿਆ ਦੀ ਸਿਹਤ ਦਾ ਖਾਸ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

                          ਬੱਚਿਆ ਦੀ 5 ਸਾਲ ਤੋਂ ਲੈਕੇ 14 ਸਾਲ ਤੱਕ ਦੇ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਉਮਰ ਤੱਕ ਥੋੜ੍ਹੀ ਜਿਹੀ ਸਖਤੀ ਵਰਤਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਬੱਚਿਆ ਨੂੰ ਇਸ ਉਮਰ ਵਿੱਚ ਚੰਗਾ ਬੁਰਾ ਸੱਭ ਦੇ ਬਾਰੇ ਦੱਸਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਦੀਆ ਗਲਤੀਆਂ ਨੂੰ ਵੀ ਸੁਧਾਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਬੱਚਿਆ ਦੀ ਪੜ੍ਹਾਈ ਦਾ ਵੀ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਵੱਡੇ ਛੋਟੇ ਦੀ ਇੱਜ਼ਤ ਕਰਨੀ ਅਤੇ ਵੱਡਿਆ ਦਾ ਸਤਿਕਾਰ ਕਰਨ ਬਾਰੇ ਵੀ ਦੱਸਣਾ ਸਾਡਾ ਫਰਜ਼ ਹੈ। ਬੱਚਿਆ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਧਰਮ ਬਾਰੇ ਵੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇਣੀ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਅਤੇ ਬਾਕੀ ਧਰਮਾਂ ਦੇ ਸਤਿਕਾਰ ਕਰਨ ਬਾਰੇ ਦੱਸਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

                            ਬੱਚੇ ਜਦੋਂ 14 ਸਾਲ ਤੋਂ ਉੱਪਰ ਚੱਲ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਖਾਸ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਪੈਂਦਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਬੱਚੇ 14 ਤੋਂ ਲੈਕੇ 21 ਸਾਲ ਤੱਕ ਬੜੇ ਨਾਜੁਕ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਉਮਰ ਵਿੱਚ ਬੱਚਿਆ ਨੂੰ ਪੜ੍ਹਾਈ ਲਈ ਕਈ ਮਾਪੇ ਘਰ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਵੀ ਭੇਜ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿੱਥੇ ਓਹ ਨੌਜਵਾਨ ਪੀੜ੍ਹੀ ਨਾਲ ਮਿਲਕੇ ਆਪਣੀ ਮਰਜ਼ੀ ਦੀ ਜਿੰਦਗੀ ਜਿਓਣ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰਦੇ ਹਨ।

                            ਜਦੋਂ ਬੱਚੇ ਬਾਹਰ ਪੜ੍ਹਨ ਲੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਉਹ ਆਪਣੀ ਅਜਾਦੀ ਮੰਨਦੇ ਹਨ ਪਰ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਹੋਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬੱਚੇ ਮਾਤਾ ਪਿਤਾ ਤੋਂ ਦੂਰ ਰਹਿ ਕੇ ਇਕੱਲੇ ਰਹਿਣ ਕਾਰਨ ਆਪਣੇ ਆਪ ਹੀ ਚੰਗੇ ਬੁਰੇ ਬਾਰੇ ਖੁਦ ਖਿਆਲ ਰੱਖਦੇ ਹਨ ਜਿਹਨਾਂ ਬੱਚਿਆ ਨੂੰ ਘਰ ਵਿੱਚ ਚੰਗੀ ਸਿੱਖਿਆ ਮਿਲੀ ਹੋਵੇ ਓਹ ਕਿਤੇ ਵੀ ਰਹਿਣ ਤਾਂ ਉਹ ਘਰ ਬਾਰੇ ਸੋਚ ਕੇ ਸੰਸਕਾਰੀ ਬਣੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਪਰ ਕੁੱਝ ਏਦਾ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਕੇ ਕੁੱਝ ਬੱਚੇ ਅਜਾਦੀ ਜਿਆਦਾ ਮੰਨ ਕੇ ਗਲਤ ਸੰਗਤ ਵਿੱਚ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਜਿਸ ਨਾਲ ਉਹ ਗਲਤ ਤੇ ਪੁੱਠੇ ਕੰਮ ਪੈ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਨਸ਼ੇ ਕਰਨਾ, ਪੜ੍ਹਾਈ ਨਾ ਕਰਨਾ, ਹੋਰ ਆਦਿ।

                           ਜਦੋਂ ਬੱਚੇ ਗਲਤ ਸੰਗਤ ਵਿੱਚ ਪੈ ਕੇ ਨਸ਼ੇ ਕਰਨ ਲੱਗ ਜਾਂਦੇ ਤਾਂ ਉਹ ਘਰ ਦੀ ਬਰਬਾਦੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿਚੋਂ ਨਿਕਲਣਾ ਬਹੁਤ ਔਖਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਮੇਰੀ ਅਖੀਰ ਵਿੱਚ ਸਾਰਿਆ ਮਾਪਿਆ ਨੂੰ ਹੱਥ ਜੋੜ ਕੇ ਬੇਨਤੀ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਆਪਣੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੂੰ ਅਜਾਦੀ ਦੇਣ ਪਰ ਇਹਨੀ ਵੀ ਨਾ ਦੇਣ ਕੇ ਓਹ ਗਲਤ ਸੰਗਤ ਵਿੱਚ ਪੈ ਜਾਣ। ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਬੋਲ ਨਾ ਪੂਰੀ ਕਰੋ ਸਗੋਂ ਦਸੋ ਕਿ ਸਬਰ ਕੀ ਚੀਜ਼ ਹੈ।

                               ਧੰਨਵਾਦ ਸਹਿਤ।

Independence Day 1947

ਸੱਤ ਸ਼੍ਰੀ ਆਕਾਲ ਜੀ,
                          ਗੱਲ ਕਰਦੇ ਆ ਅੱਜ ਆਪਾ ਆਪਣੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਅਜਾਦੀ ਦਿਹਾੜੇ ਦੀ ਅਜਾਦੀ ਦਾ ਦਿਹਾੜਾ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ 15 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਮਨਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋਹ ਕੇ ਸਾਨੂੰ 1947 ਚ ਮਿਲੀ ਸੀ। ਤਕਰੀਬਨ 150 ਸਾਲ ਦੀ ਗੁਲਾਮੀ ਤੋਹ ਬਾਅਦ ਤੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਦੇਸ਼ ਪ੍ਰੇਮੀ ਦੀਆ ਸਹਾਦਤਾਂ ਤੋਹ ਬਾਅਦ ਕੀਤੇ ਜਾ ਕੇ ਸਾਨੂੰ ਅੰਗਰੇਜਾਂ ਤੋਹ ਅਜਾਦੀ ਮਿਲੀ ਸੀ।

                           1857 ਤੋਹ ਬਾਅਦ ਸਾਡੇ ਪੂਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਅੰਗਰੇਜਾਂ ਨੇ ਪੂਰੇ ਦੇਸ਼ ਉਤੇ ਕਬਜ਼ਾ ਕਰ ਲਿਆ ਸੀ ਬਸ ਉਸਤੋ ਬਾਅਦ ਹੀ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਅਜਾਦ ਕਰਵੋਨ ਲਈ ਹਰ ਵਰਗ ਦੇ ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀਆਂ ਨੇ ਅੰਗਰੇਜਾਂ ਦੇ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਬਗਾਵਤ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਸੀ। ਏਨਾ ਬਗਾਵਤਾਂ ਵਿੱਚ ਛੋਟੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਲੈਕੇ ਵੱਡੀ ਉਮਰ ਤਕ ਦੇ ਸ਼ਹੀਦ ਹੋਏ ਤੇ ਕਈ ਸਜਾ ਕੱਟਣ ਦੌਰਾਨ ਸ਼ਹੀਦ ਹੋਏ। ਬਗਾਵਤ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਇਹ ਸ਼ੁਰੂ ਮੰਗਲ ਪਾਂਡੇ ਨੇ ਅੰਗਰੇਜ ਅਧਿਕਾਰੀ ਨੂੰ ਮਾਰਕੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਸੀ ਜਿਸਨੂੰ ਫਿਰ ਸ਼ਹੀਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਸੀ।

                             ਇਹ ਬਗਾਵਤ ਦੀ ਅੱਗ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਵੀ ਪੂਰੀ ਜੋਰਾ ਫੜ ਚੁੱਕੀ ਸੀ ਇਸ ਬਗਾਵਤ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੇ ਬੀ ਵੱਧ ਸਾਥ ਦਿੱਤਾ ਜਿਸ ਵਿਚ ਕਰਤਾਰ ਸਿੰਘ ਸਰਾਭਾ ਜਿਸਨੂੰ ਸਿਰਫ 19 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਵਿੱਚ ਹੀ ਸ਼ਹੀਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਸੀ ਫਿਰ ਸ਼੍ਰੀ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਸਾਹਿਬ ਵਿਖੇ ਵੈਸਾਖੀ ਮਨਾਉਣ ਲਈ ਆਏ ਲੋਕ ਜਿਹਨਾਂ ਦਾ ਇੱਕਠ ਜਿਲਿਆ ਵਾਲਾ ਬਾਗ ਚ ਹੋਇਆ ਸੀ ਤੇ ਉਸ ਦਿਨ ਅੰਗਰੇਜ ਆਫਿਸਰ ਜਨਰਲ ਡਾਇਰ ਨੇ ਭਾਰੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਫੌਜ ਲੈਕੇ ਨਿਹਥੇ ਲੋਕਾਂ ਤੇ ਗੋਲੀ ਚਲਵਾ ਦਿੱਤੀ ਤੇ ਸ਼ਹੀਦ ਕਰ ਦਿੱਤੇ ਇਹਨਾਂ ਗਲਾ ਦਾ ਅਸਰ ਸ਼ਹੀਦ ਊਧਮ ਸਿੰਘ ਤੇ ਭਗਤ ਸਿੰਘ ਤੇ ਹੋਰ ਬਹੁਤ ਨੌਜਵਾਨ ਪੀੜ੍ਹੀ ਤੇ ਅਸਰ ਪਿਆ ਸੀ।

                            ਭਗਤ ਸਿੰਘ ਨੇ ਆਪਣੇ ਸਾਥੀਆ ਨਾਲ ਮਿਲਕੇ ਨੌਜਵਾਨ ਸਭਾ ਸੰਗਠਨ ਬਣਿਆ ਤੇ ਸਾਰੇ ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਰੀਆਂ ਨੂੰ ਇਕੱਠਾ ਕਰਕੇ ਅੰਗਰੇਜਾਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਬਗਾਵਤ ਨੂੰ ਹੋਰ ਮਜਬੂਤ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਜਿਸਦਾ ਅਸਰ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਬੀ ਮਿਲਿਆ ਭਗਤ ਸਿੰਘ ਤੇ ਉਸਦੇ ਸਾਥੀ ਨੇ ਮਿਲਕੇ ਅਸੰਬਲੀ ਹਾਲ ਵਿੱਚ ਧਮਾਕਾ ਬੰਬ ਸੁੱਟ ਕੇ ਅੰਗਰੇਜ਼ ਹਕੂਮਤ ਦੇ ਕੰਨ ਖੋਲ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿੱਤੇ ਤੇ ਜਿਸ ਕਰਕੇ ਭਗਤ ਸਿੰਘ ਤੇ ਉਸਦੇ ਸਾਥੀ ਨੂੰ ਗਿਰਫ਼ਤਾਰ ਕਰ ਲਿਆ ਤੇ ਮੁੱਕਦਮਾ ਚਲਿਆ ਜੌ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ 1931 ਵਿੱਚ ਭਗਤ ਸਿੰਘ ਤੇ ਉਸਦੇ ਸਾਥੀਆਂ ਨੂੰ ਫਾਂਸੀ ਦਿੱਤੀ ਗਈ। ਊਧਮ ਸਿੰਘ ਨੇ ਜਲਿਆ ਵਾਲਾ ਬਾਗ ਦੇ ਦੋਸ਼ੀ ਜਨਰਲ ਡਾਇਰ ਨੂੰ ਇੰਗਲੈਂਡ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਗੋਲੀ ਮਾਰ ਕੇ ਲਿਆ।

                          ਏਦਾ ਦੇ ਹੋਰ ਵੀ ਵੀ ਬਹੁਤ ਕਰਾਂਤੀਕਾਰੀ ਜਿਵੇਂ ਕੇ ਚੰਦਰ ਸ਼ੇਖਰ ਆਜ਼ਾਦ, ਰਾਜਗੁਰੂ, ਸੁਖਦੇਵ ਅਤੇ ਹੋਰ ਬਿ ਜਿਹਨਾਂ ਨੂੰ ਅੰਗਰੇਜਾਂ ਨੇ ਬਗਾਵਤ ਕਰਨ ਕਰਕੇ ਸ਼ਹੀਦ ਕਰ ਦਿੱਤੇ ਗਏ। ਇਹਨਾਂ ਕੁੱਝ ਹੋਣ ਤੋ ਬਾਅਦ ਕੀਤੇ ਜਾ ਕੇ 15 ਅਗਸਤ 1947 ਨੂੰ ਦੇਸ਼ ਅਜਾਦ ਹੋਇਆ ਪਰ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਦੋ ਹਿੱਸੇ ਬੀ ਕੀਤੇ ਗਏ ਇੱਕ ਪਾਸੇ ਭਾਰਤ ਤੇ ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਬਣਿਆ ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਹੀ ਦੋ ਹਿੱਸੇ ਹੋਏ ਜੋਹ ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਵਾਲੇ ਪਾਸੇ ਚੜਦਾ ਪੰਜਾਬ ਤੇ ਪਾਕਿਸਤਾਨ ਵਾਲੇ ਪਾਸੇ ਲਹਿੰਦਾ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਨਾਮ ਨਾਲ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਵੰਡਿਆ ਚ ਬਹੁਤ ਹੀ ਭਾਰੀ ਨੁਕਸਾਨ ਭੀ ਹੋਇਆ।

                              ਸੁਣਦੇ ਆ ਰਹੇ ਹਾਂ ਕਿ ਅਜਾਦੀ ਸਾਨੂੰ ਗਾਂਧੀ ਦੇ ਚਰਖਿਆ ਨਾਲ ਮਿਲੀ ਆ ਪਰ ਮੈਨੂੰ ਇਹ ਨਹੀਂ ਸਮਝ ਆਉਂਦੀ ਜੇਹ ਅਜਾਦੀ ਚਰਖੀਆ ਨਾਲ ਮਿਲੀ ਤਾਂ ਫਿਰ ਫਾਂਸੀ ਤੇ ਲਟਕਣ ਵਾਲੇ ਕੌਣ ਸੀ ਜਿਹਨਾਂ ਦਾ ਅੱਜ ਤੱਕ ਵੀ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਸ਼ਹੀਦ ਦਾ ਦਰਜਾ ਨਹੀਂ ਹੈ।  ਅੱਜ ਸਾਡਾ ਸਾਰਾ ਦੇਸ਼ ਅਜਾਦੀ ਦਿਹਾੜਾ ਮਨਾ ਰਿਹਾ ਪਰ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਦੇਸ਼ ਅਜਾਦ ਨਹੀਂ ਹੋਇਆ ਦੇਸ਼ ਦੇ 2 ਟੁਕੜੇ ਹੋਏ ਸੀ ਜਿਸਦਾ ਭੁਗਤਾਨ ਉਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਭਾਰੀ ਨੁਕਸਾਨ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਿਆ।

                            ਲਿਖਣਾ ਤਾਂ ਹੋਰ ਵੀ ਬਹੁਤ ਕੁੱਝ ਚੁਹੰਦਾ ਹਾ ਪਰ ਲਿਖਦੇ ਲਿਖਦੇ ਥਕ ਜਵਾਗੇ ਪਰ ਲਿਖਣਾ ਖਤਮ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ। ਦੋਸਤੋ ਤੁਸੀਂ ਸਹੀ ਦਸਿਓ ਅੱਜ ਸਾਨੂੰ ਅਜਾਦੀ ਸਹੀ ਮਾਇਨੇ ਵਿੱਚ ਮਿਲੀ ਹੋਈ ਜਾਂ ਨਹੀਂ ਦੋਸਤੋ ਮੇਰੀ ਪੋਸਟ ਕਿੱਦਾ ਦੀ ਲੱਗੀ ਜਰੂਰ ਕਮੇਂਟ ਕਰਕੇ ਦਸਿਓ ਤੇ ਅੱਗੇ ਵੀ forward karyo।

                          ਧੰਨਵਾਦ ਸਹਿਤ।

ਸਾਡੀ ਮਾਂ ਬੋਲੀ ਪੰਜਾਬੀ

ਸੱਤ ਸ਼੍ਰੀ ਆਕਾਲ ਜੀ,                        ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਜੇਕਰ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਬਦ ਅਸੀਸ ਦੇਣੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਆਖ ਦੇਵੋ  ' ਜਾਹ ਤੈਨੂੰ ਤੇਰੀ ਮਾਂ...